कुछ वर्षों पूर्व मेरा ये विचार था कि सत्य शाश्वत होता है, किसी ने अपना विचार रखा कि सत्य गतिमान होता है. हो सकता है कि ये दोनों ही बातें सही हों, पर इतने वर्षों के विचार मंथन के बाद यही समझ में आया है कि व्यक्त हो या अव्यक्त, गतिमान हो यो स्थिर, सत्य अटल होता है, तथा सही समय पर ही प्रकट होता है. जब भी प्रकट हो, वही उचित समय होता है. सत्य का प्रकट हो जाना मानव के हित में ही होता है.