चंद अशआर:-
१.
हँसना-रोना भी गया, मुस्कान भी,
हाथ खाली रह गए, और झोली भी।
२.
याद करने से भी डर जाते हैं हम,
तकलीफ़ न हो हिचकियों से उन्हें।
३.
इश्क़ का सबक़ तो डूबकर मिला,
गिरे हुए से पूछते हो, अब करते हो क्या।
४.
ज़िन्दगी की सब शोख़ियाँ नसीब हों तुझे,
दुआ ही देते हैं, अब ग़िला तक बचा नहीं यहाँ।
५.
सज़ा-ऐ-गुनाह से, अब डरते नहीं हैं हम,
अर्ज़ी-ऐ-वफ़ा, लगा बैठे हैं सज़दे में महबूब के।
६.
जो जल्दी में चले जाते हैं, उन्हें ग़म बड़े लगते हैं ज़माने के,
थोड़ा ठहर के देखें तो हर जगह, मौक़े हैं ख़ुशी कमाने के।
७.
ज़िन्दगी की राहें हैं मुश्क़िल, नाज़ुक सा ये दिल,
भूल कर उनको, सोया ही रहे, तो सम्हल सके,
नादान बच्चा सा दिल, पूछता है कहाँ हूँ मैं कहाँ,
कहती है ज़िन्दगी दिल से, तू जहाँ मैं भी हूँ वहाँ।
८.
दुश्मन-ऐ-जाँ मना ले जश्न कितने भी,
दुआ-ऐ-दोस्त की हमें कमी तो नहीं।
९.
बात तक करने का, जिन्हें नहीं है शऊर,
आँखों को पढ़ने की, उनसे रखते हो उम्मीद,
बड़ी बेइंसाफी है जनाब, जाने उसे दीजिये,
वक़्त सब सिखा देगा, एक मौका तो दीजिये।