Friday, June 26, 2015

(13) "बारिशें"

बारिशें,
भिगोयें सारा आलम,
भिगोयें धरती औ गगन,

बारिशें,
महकाएँ अपनी ख़ुश्बू से,
मेरा मन तेरा मन,


बारिशें,
न जाने कहाँ से आयें,
शीतल कर जायें पवन,

बारिशें,
अनोखे अनकहे प्रेम की,
सफल कर जायें जीवन।

Thursday, June 4, 2015

Conditional and Unconditional

It is a relationship that is conditional, not love.
It is a relationship that is conditional, not support.
It is a relationship that is conditional, not trust.
It is a relationship that is conditional, not respect.
It is a relationship that is conditional, not feelings.
.......but a relationship is based on love, support, trust, respect and feelings.

Wednesday, June 3, 2015

चंद अशआर:-

१.
हँसना-रोना भी गया, मुस्कान भी,
हाथ खाली रह गए, और झोली भी।

२.
याद करने से भी डर जाते हैं हम,
तकलीफ़ न हो हिचकियों से उन्हें।

३.
इश्क़ का सबक़ तो डूबकर मिला,
गिरे हुए से पूछते हो, अब करते हो क्या।

४.
ज़िन्दगी की सब शोख़ियाँ नसीब हों तुझे,
दुआ ही देते हैं, अब ग़िला तक बचा नहीं यहाँ।

५.
सज़ा-ऐ-गुनाह से, अब डरते नहीं हैं हम,
अर्ज़ी-ऐ-वफ़ा, लगा बैठे हैं सज़दे में महबूब के।

६.
जो जल्दी में चले जाते हैं, उन्हें ग़म बड़े लगते हैं ज़माने के,
थोड़ा ठहर के देखें तो हर जगह, मौक़े हैं ख़ुशी कमाने के।

७. 
ज़िन्दगी की राहें हैं मुश्क़िल, नाज़ुक सा ये दिल,
भूल कर उनको, सोया ही रहे, तो सम्हल सके,
नादान बच्चा सा दिल, पूछता है कहाँ हूँ मैं कहाँ,
कहती है ज़िन्दगी दिल से, तू जहाँ मैं भी हूँ वहाँ।

८.
दुश्मन-ऐ-जाँ मना ले जश्न कितने भी,
दुआ-ऐ-दोस्त की हमें कमी तो नहीं।

९.
बात तक करने का, जिन्हें नहीं है शऊर,
आँखों को पढ़ने की, उनसे रखते हो उम्मीद,
बड़ी बेइंसाफी है जनाब, जाने उसे दीजिये,
वक़्त सब सिखा देगा, एक मौका तो दीजिये।
स्वर्णिम और मेरी कल की बात-चीत (जिसने मुझे सोचने पर मजबूर किया):-
स्वर्णिम ने बताया, "मम्मा,स्कूल से आते समय आज मुझे वो फिर से दिखा।"
मैंने पूछा, "कौन?"
स्वर्णिम का उत्तर,"वही होमलेस मैन। और एक बालक(स्वर्णिम का सहपाठी) ने कहा कि पुलिस इसे पकड़ती क्यों नहीं है?"
मैंने कहा, "हाँ, पुलिस को उसे रिमांड होम/ करेक्शन होम में रखना चाहिये। कम से कम उसे खाना तो मिलेगा"
स्वर्णिम का कथन, "पुलिस उसे क्यों पकड़े? आखिर उसका अपराध क्या है ? क्या ये अपराध है कि उसके पास घर नहीं है ?"
मैंने तर्क दिया, "शायद वो बीमार हो, शायद वो पागल हो (हमने कई बार उसे कूड़े में से खाना और दूसरी चीज़ें ढूंढते देखा है, पर दिन के समय वो इस इलाके में नहीं दिखता, पता नहीं कहाँ चला जाता है)"
स्वर्णिम का उत्तर, "नहीं मम्मा, वो पागल नहीं है, रेड लाइट के सिग्नल पर रुक जाता है, लाइट ग्रीन होने पर ही रोड क्रॉस करता है"
मैंने बात आगे बढ़ाई,"तुम्हारे विचार से ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिये?"
स्वर्णिम ने सुझाव दिया, "यहाँ की सरकार को ऐसे लोगों के लिये, जिनके पास घर और पैसे नहीं हैं, शेल्टर-होम बनाने चाहिये"
(मुझे याद आ गये भारत के वो असंख्य रेलवे स्टेशन जो इन जैसे निराश्रित लोगों के घर हैं, सर्दी-गर्मी-वर्षा से बचने के शरण-स्थल हैं) घर-भोजन-रिश्तों की अहमियत बढ़ जाती है जब आप किसी ऐसे इंसान से रूबरू होते हैं।

कवियों और लेखकों की श्रेणियाँ

कुछ समय पहले तक "कवियों और लेखकों" से मेरा मन उचाट हो गया था, और एक धारणा बन गयी थी कि इनकी कई श्रेणियाँ होती हैं।
पहली एवं उत्कृष्ट श्रेणी:- वे रचनाकार जो ईमानदारी से विशुद्ध लेखन करते हैं, निडरतापूर्वक "स्व" को रूप देते हैं, शायद ऐसे ही रचनाकारों की रचनायें कालजयी होती हैं।
दूसरी श्रेणी:- वे रचनाकार जो अर्थशास्त्री होते हैं, बाज़ार की क्रियाओं के अनुरूप लेखन करते हैं। माँग और पूर्ति के नियम से भली-भाँति परिचित होते हैं।
तीसरी श्रेणी:- वे रचनाकार जो किसी भी प्रकार निष्पक्ष नहीं होते हैं, अर्थात किसी न किसी प्रकार के पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं।
चतुर्थ श्रेणी:- खिचड़ी होते हैं, या कहें कि सर्वगुणसंपन्न होते हैं।

कुल मिला कर निष्कर्ष ये निकला कि रचनाकार चाहें किसी भी श्रेणी में आयें, इनका साहसी होना पहली अनिवार्यता है, क्योंकि जो साहसी ही नहीं वो "स्व" को रूप कैसे प्रदान कर सकता है? ये सारा जीवन इसी "स्व" के रूपांतरण हेतु ही तो है, अन्यथा इसका क्या प्रयोजन है?
[पढ़ने-लिखने की आशा पुनः जाग्रत हो गयी है]