हरहर हरहर चले हवारा,
मौसम का कैसा है नज़ारा,
गहरे काले बादल छाये,
तूफां का अंदेशा जगाये,
मन मतवाला पँछी बनता,
बिना डरे ही गाता जाता,
ओ बादल आकाश के राजा,
थोड़ी वर्षा इधर करा जा,
हरी भरी चूनर सज जाये,
धरती माता ख़ुश हो जाये,
तपे हुये तन-मन खिल जायें,
लोग चाय और पकौड़ी खायें,
वर्षा ऋतु है बड़ी सुहानी,
एक बरस के बाद है आनी,
जीभर याद बसा लो मन में,
फिर ना कहना भीग न पाये।
मौसम का कैसा है नज़ारा,
गहरे काले बादल छाये,
तूफां का अंदेशा जगाये,
मन मतवाला पँछी बनता,
बिना डरे ही गाता जाता,
ओ बादल आकाश के राजा,
थोड़ी वर्षा इधर करा जा,
हरी भरी चूनर सज जाये,
धरती माता ख़ुश हो जाये,
तपे हुये तन-मन खिल जायें,
लोग चाय और पकौड़ी खायें,
वर्षा ऋतु है बड़ी सुहानी,
एक बरस के बाद है आनी,
जीभर याद बसा लो मन में,
फिर ना कहना भीग न पाये।
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