Saturday, August 29, 2015

(16) "रक्षा-बंधन"

हमको लगता सबसे प्यारा,
भाई-बहन का रिश्ता न्यारा,

भाई बड़ा हो छोटी बहना,
बस उसके अब ऐश क्या कहना,
मनमानी चीज़ें मंगवाये,
रूठ जाये तो भाई मनाये,

बड़ी बहन हो छोटा भाई,
हर ग़लती पर डाँट लगाई,
नये-नये पकवान खिलाये,
भाई पर कोई आँच न आये,

जुड़वाँ हुये तो साथ ही खेलें,
मम्मी-पापा फूले न समायें,
कठिन प्रक्रिया इनका पालन,
एक लाड़ली, दूजा लालन,

घर में जब हों भाई-बहनें,
कभी कहीं न अकेले जायें,
लड़ते-झगड़ते, रूठें-मनायें,
मित्र बनें, दिल खुलते जायें,

रक्षा-बंधन है प्रेम का बंधन,
रिश्ते दिल से निभते जायें,
सामाजिकता का पाठ-पढ़ाते,
त्योहार हैं बस प्रतीक हमारे।

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