अच्छा स्वास्थ्य सबसे बड़ी स्वतंत्रता है क्योंकि अच्छे स्वास्थ्य वाला व्यक्ति आत्मनिर्भर होता है, अतः किसी भी प्रकार का नशा आपकी इस सबसे बड़ी और पहली स्वतंत्रता के लिये बाधा है। इससे दूर रहना ही स्वतंत्र होने का द्योतक है। आप तब अपने को स्वतंत्र नहीं मान सकते, जब आप "शौक़" की किसी भी वस्तु को ख़रीद सकने की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं, आप सही मायनों में तब स्वतंत्र हैं, जब आप ये बुद्धि-विवेक अर्जित कर लेते हैं कि आपके स्वयं के लिये क्या उचित है, और आप वास्तव में चाहते क्या हैं। जब-तक आपके विचारों में ये शुद्धता नहीं आ जाती है, तब-तक आप किसी न किसी चीज़ के ग़ुलाम बने ही रहेंगे, नशा क्या बड़ी चीज़ है। चीज़ें अपने शुद्ध रूप में बुरी नहीं होतीं, उनके प्रयोग के लिये क्या भावना कार्य करती है वही मुख्य है।
"नशा शराब में होता तो नाचती बोतल"
शिकंजी या लस्सी तो गर्मी से राहत देती हैं, भारत जैसे गरम देश में शराब की ज़रुरत मौसम के किस हिसाब से है मुझे समझ में नहीं आता, ख़ैर ये व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का विषय अवश्य है। यदि ये आवश्यकता है, तो अवश्य इसकी पूर्ति होनी चाहिये, परन्तु यदि ये मात्र "दिखावे का उपभोग (Conspicuous Consumption)" है, तो इसके प्रयोग को किसी भी रूप में बढ़ावा तो नहीं दिया जाना चाहिये। हमारी पीढ़ी को इस पर विचार करना चाहिये।
[नशे से तात्पर्य=सभी प्रकार के नशे, कोई भी ऐसी चीज़ जिसके प्रयोग से रोके जाने पर आपको क्रोध आता है]
"नशा शराब में होता तो नाचती बोतल"
शिकंजी या लस्सी तो गर्मी से राहत देती हैं, भारत जैसे गरम देश में शराब की ज़रुरत मौसम के किस हिसाब से है मुझे समझ में नहीं आता, ख़ैर ये व्यक्तिगत पसंद-नापसंद का विषय अवश्य है। यदि ये आवश्यकता है, तो अवश्य इसकी पूर्ति होनी चाहिये, परन्तु यदि ये मात्र "दिखावे का उपभोग (Conspicuous Consumption)" है, तो इसके प्रयोग को किसी भी रूप में बढ़ावा तो नहीं दिया जाना चाहिये। हमारी पीढ़ी को इस पर विचार करना चाहिये।
[नशे से तात्पर्य=सभी प्रकार के नशे, कोई भी ऐसी चीज़ जिसके प्रयोग से रोके जाने पर आपको क्रोध आता है]
No comments:
Post a Comment