Wednesday, November 4, 2015

सरोगेसी: किराये की कोख़

सरोगेसी यानि किराए की कोख़ पर बहुत कुछ पढ़ा, देखा और सुना, और अंत में जाकर मैं इसी नतीजे पर पहुँची हूँ कि ये स्त्री शरीर के साथ विज्ञान का एक खिलवाड़ है और मैं इस खिलवाड़ के विरोध में हूँ।
अब, बहुत से लोग, जो सरोगेसी के पक्ष में हैं, उनसे निवेदन है कि वो अपना समय मेरे विचारों को आगे पढ़ने में न नष्ट करें।
बिन्दुवार अपने विचार रखने का प्रयास करूँगी:-
1. सरोगेसी के बारे में सबसे ख़तरनाक विचार, जिसके द्वारा स्वस्थ, पढ़ी-लिखी परन्तु आर्थिकरूप से असमर्थ महिलाओं की कंडीशनिंग की जाती है वो ये है कि, सरोगेसी एक बहुत "पुण्य" का काम है, जिसे करके वो किसी दम्पति को ख़ुशी देने जा रही हैं, माँ न बन सकी स्त्री को मातृत्व सुख देने जा रही हैं। अब आप सोचेंगे कि ये ख़तरनाक विचार क्यों हो गया, ये तो बहुत अच्छी सोच है। तो मैं कहूँगी, बिल्कुल अच्छी सोच है यदि, सरोगेसी का निर्णय लेने वाली महिला आर्थिकरूप से आत्मनिर्भर है (उसे और रुपयों की ज़रुरत नहीं है) तो, ये विचार, अपनी कोख़ का " दान" सर्वथा उचित है। पर समस्या यही है हमारे समाज की, कि हमने "पाप" और "पुण्य" के बड़े-बड़े मानदण्ड बना रखे हैं। यदि कोई महिला सहवास करके गर्भिणी हो जाती है, किन्ही विशेष परिस्थितियों में, तो वो पापी होती है, उसके अलग़ पैमाने, संतान भी अवैध हो गयी फिर। परन्तु यदि वो सेरोगेसी के लिए अपनी कोख़ किराये पर दे देती है, तो वो पुण्यात्मा हो गयी। (यदि इस पूरी प्रक्रिया में धन/मुद्रा न सम्मिलित हो तो शायद इसे पुण्य माना भी जाये, मैं बिल्कुल ऐसा नहीं मानती)
2. सरोगेसी से प्राप्त धन क्या उस महिला को मिलता है जिसने नौ-दस महीने एक जीव को गर्भ में रखा। उत्तर नकारात्मक ही मिलेगा, क्योकि, आर्थिक कठिनाई, जिसके कारण महिला इस प्रक्रिया के लिए राज़ी हुई थी, वह आर्थिक कठिनाई अकेले महिला की नहीं अपितु पूरे परिवार की है। यदि आर्थिक कठिनाई के कारण महिला को अपनी कोख़ किराये पर चढ़ानी पड़ी तो फिर शरीर बेचना भी वैध होना चाहिये।
3. क्या आप मानते हैं कि गर्भावस्था मात्र नौ-दस महीने की होती है? प्रसव के बाद क्या स्त्री में शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक बदलाव नहीं आते? क्या सरोगेसी इस सब से अछूती है?
4. गर्भावस्था के पूरे काल में कितनी अप्रत्याशित समस्यायें आ सकती हैं। स्त्री की मृत्यु भी हो सकती है। क्या सरोगेसी इन सबसे ऊपर है?
5. आज तक कितनी सक्षम स्त्रियों ने, जो स्वयं डॉक्टर हैं, और सरोगेसी के पक्ष में हैं, सरोगेसी के लिये अपनी कोख़ उधार दी है? बिना स्वयं इस प्रक्रिया का हिस्सा बने, इसके पक्ष में होना आपकी ईमानदारी पर प्रश्न उठाता है। वो बात अलग़ है जब आप स्वयं ही किसी और की सरोगेसी का इंतज़ार कर रही हों।
6. सरोगेसी किसी भी प्रकार से महिला सशक्तिकरण नहीं है। भविष्य में महिलायें यह भी कह सकती हैं कि मैं तो पैसा बना सकती हूँ क्योंकि मेरे पास एक कोख़ है जिसे मैं किराये पर चढ़ा सकती हूँ। मेरा शरीर ही मेरी संपत्ति है।
7. अपने ही बीज का पौधा क्यों चाहिये? इसलिये क्योंकि हम समर्थ हैं, क्योंकि हम पैसा देकर कोख़ उधार ले सकते हैं, क्योंकि हम अपनी वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं, क्योंकि हमें और चाहिये।
8. यदि किसी स्त्री की माँ, सासू-माँ या कोई और शुभचिंतक ऐसी सहायता करने में समर्थ है, और करता है, तो मैं इसे अनुचित नहीं मानती, पर क्या ऐसा होता है?
यदि आपके पास इनके विपरीत तर्क हैं और उनसे मैं सहमत हूँ तो मैं संशोधन अवश्य करूँगी।

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