मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि उच्चशिक्षा के सम्बंध में कुछ प्रश्न पूछे जायें।
1. क्या वास्तव में उच्च शिक्षा का सुलभ होना देश की प्रगति के लिये उचित है?
2. क्या उच्चशिक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा जितना भी धन व्यय किया जाता है वो प्रतिफल में परिवर्तित होता है? (Is the "return of money" equally proportional to the "money spent" in developing the infrastructure for higher education system in India?)
3. क्या कारण हैं कि उच्च शिक्षा रोज़गारप्रद नहीं है?
4. क्या उच्च शिक्षा को जीविकोपार्जन से जोड़ा जाना उचित है?
5. क्या विश्वविद्यालयी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्रायें वास्तव में उस शिक्षा को प्राप्त करने योग्य हैं?
6. क्या विश्वविद्यालयों में आने वाले छात्र-छात्रायें स्वयं अपनी इच्छा से, ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं?
7. क्या छात्र-छात्रायें मजबूरी व घरवालों के दबाव में विश्वविद्यालयी शिक्षा का हिस्सा बन रहे हैं?
8. क्या छात्र-छात्रायें मात्र एक फ़ैशन के रूप में और "कुछ नहीं से कुछ अच्छा" के विचार से महाविद्यालय आते हैं?
9. क्या भारत जैसा देश इस प्रकार की फ़ैशनेबल शिक्षा का वहन कर सकता है?
10. क्या ये अच्छा न हो कि जिन लोगों के लिये सरकारी नौकरियों में पद/स्थान आरक्षित हैं उसी वर्ग विशेष के लोग महाविद्यालयों में अपना समय और धन व्यय करें। बाकी बचा-खुचा वर्ग 12th के बाद की पढ़ाई में वह कार्य सीखे जो उसके लिये आगे जाकर जीविकोपार्जन में सहायक सिद्ध हो?
1. क्या वास्तव में उच्च शिक्षा का सुलभ होना देश की प्रगति के लिये उचित है?
2. क्या उच्चशिक्षा हेतु भारत सरकार द्वारा जितना भी धन व्यय किया जाता है वो प्रतिफल में परिवर्तित होता है? (Is the "return of money" equally proportional to the "money spent" in developing the infrastructure for higher education system in India?)
3. क्या कारण हैं कि उच्च शिक्षा रोज़गारप्रद नहीं है?
4. क्या उच्च शिक्षा को जीविकोपार्जन से जोड़ा जाना उचित है?
5. क्या विश्वविद्यालयी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र-छात्रायें वास्तव में उस शिक्षा को प्राप्त करने योग्य हैं?
6. क्या विश्वविद्यालयों में आने वाले छात्र-छात्रायें स्वयं अपनी इच्छा से, ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं?
7. क्या छात्र-छात्रायें मजबूरी व घरवालों के दबाव में विश्वविद्यालयी शिक्षा का हिस्सा बन रहे हैं?
8. क्या छात्र-छात्रायें मात्र एक फ़ैशन के रूप में और "कुछ नहीं से कुछ अच्छा" के विचार से महाविद्यालय आते हैं?
9. क्या भारत जैसा देश इस प्रकार की फ़ैशनेबल शिक्षा का वहन कर सकता है?
10. क्या ये अच्छा न हो कि जिन लोगों के लिये सरकारी नौकरियों में पद/स्थान आरक्षित हैं उसी वर्ग विशेष के लोग महाविद्यालयों में अपना समय और धन व्यय करें। बाकी बचा-खुचा वर्ग 12th के बाद की पढ़ाई में वह कार्य सीखे जो उसके लिये आगे जाकर जीविकोपार्जन में सहायक सिद्ध हो?