सुमनों से सुरभित शाम लिखूँ,
या सुरमई सी एक रात लिखूँ,
मन उपवन का आनंद लिखूँ,
या तारों भरा आकाश लिखूँ,
सुरों से सजीला राग लिखूँ,
या कोई फागुनी फाग लिखूँ,
रंगों का कारोबार करूँ,
या तुम्हें गुलाल से लाल करूँ,
धानी रंग की मैं चूनर ओढूँ,
या रंग बसंती में तुम्हें ढ़कूँ,
बादामी रंग की लहर बनूँ,
या रुपहली सी चमकार बनूँ,
बैंगनी रंग का वृक्ष बनूँ,
या अँगूरी रंग की लता बनूँ,
नारंगी या लाल पलाश बनूँ,
या थोड़ा सा सुनहरा उठा लूँ,
हिमसागर सा हल्का नील बनूँ,
या जग सरिता सी मलीन दिखूँ,
(ईश्वर मेरे)
सब रंग तुमसे ही छीनूँ,
इन रंगों से आचमन करूँ।
या सुरमई सी एक रात लिखूँ,
मन उपवन का आनंद लिखूँ,
या तारों भरा आकाश लिखूँ,
सुरों से सजीला राग लिखूँ,
या कोई फागुनी फाग लिखूँ,
रंगों का कारोबार करूँ,
या तुम्हें गुलाल से लाल करूँ,
धानी रंग की मैं चूनर ओढूँ,
या रंग बसंती में तुम्हें ढ़कूँ,
बादामी रंग की लहर बनूँ,
या रुपहली सी चमकार बनूँ,
बैंगनी रंग का वृक्ष बनूँ,
या अँगूरी रंग की लता बनूँ,
नारंगी या लाल पलाश बनूँ,
या थोड़ा सा सुनहरा उठा लूँ,
हिमसागर सा हल्का नील बनूँ,
या जग सरिता सी मलीन दिखूँ,
(ईश्वर मेरे)
सब रंग तुमसे ही छीनूँ,
इन रंगों से आचमन करूँ।
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