Monday, February 23, 2015

अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम |
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरुवै नमः ||

अर्थ : खण्डित न हो सकने वाले, संपूर्ण संसाररूपी, प्रत्येक चर व अचर में व्याप्त, ऐसे ईश्वर के दर्शन कराने वाले गुरु को मैं नमन करता हूँ |

आज-कल ये श्लोक " चक्रवर्ती सम्राट अशोक" नाम से प्रसिद्ध सीरियल में सुनाई देता है, आज मेरे पुत्र जी ने मुझसे इसका अर्थ पूछा, यदि मेरे द्वारा किये हुए अनुवाद में कोई त्रुटि हो तो कृपया सूचित करें |

"मातृभाषा दिवस" 21 फरवरी 2015 के उपलक्ष में यह पोस्ट हिंदी में.……

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