जब शरीर साथ छोड़ रहा हो और आप अपनी पीड़ा किसी भी भाषा में व्यक्त न कर सकते हों तो सारा व्याकरण का ज्ञान व्यर्थ है, आज मैं इस सच को हृदय में महसूस कर रही हूँ, मेरे इस सच का ज्ञान कब तक मेरा साथ देगा ये नहीं जानती, परन्तु इसी सच को अनुभव कर रही हूँ अभी (मैं पूरी तरह स्वस्थ हूँ, पर फिर भी यह अनुभूति कष्टकर है )
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