मधुर वचन है औषधि, कटु वचन है तीर,
श्रवण द्वार ह्वये संचरै, सालै सकल शरीर,
हम ग़मज़दा हैं, लायें कहाँ से ख़ुशी के गीत,
देंगे वही, जो पाएंगे इस ज़िन्दगी से हम
तुम मेरे साथ जो रोये, तो है दोस्ती के जानिब,
तुम मेरी बात पे रो दो, ये मुझे क़ुबूल नहीं।
श्रवण द्वार ह्वये संचरै, सालै सकल शरीर,
हम ग़मज़दा हैं, लायें कहाँ से ख़ुशी के गीत,
देंगे वही, जो पाएंगे इस ज़िन्दगी से हम
तुम मेरे साथ जो रोये, तो है दोस्ती के जानिब,
तुम मेरी बात पे रो दो, ये मुझे क़ुबूल नहीं।
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