स्त्रियाँ जन्म लेती हैं पर मरती नहीं,
वो जीती हैं, हर जगह,
रोशनी की तरह, हँसी की तरह,
ख़ुशी की तरह, ज़िन्दगी की तरह,
समय की तरह, खूबसूरती की तरह,
अनुसूया की तरह, अहिल्या की तरह,
सीता की तरह, सावित्री की तरह,
द्रौपदी की तरह, सती की तरह,
सहती हैं वेदना, पीड़ा और अपमान,
मुस्कुरा देती हैं फिर भी, भुला कर,
फिर वही सुबह, फिर वही दिन,
फिर वही जीवन, फिर वही आलोड़न,
छली जाती हैं, युगों-युगों तक,
फिर भी मरती नहीं,
वो चेतना हैं, अनन्त हैं, सर्व हैं,
व्याप्त हैं, सर्वत्र हैं,
वो नहीं हैं, तो जीवन नहीं,
भाव नहीं, भोजन नहीं,
पूजन करो करुणामयरूप का,
कालरूपिणी भी स्त्री है,
विस्मृत नहीं होता है कुछ भी,
चेतन में रहता साकार,
मत करो चेतना का अपमान,
यह काल-चक्र है, आता वहीं पुनः है,
चल दिया था जहाँ से एक दिन.
वो जीती हैं, हर जगह,
रोशनी की तरह, हँसी की तरह,
ख़ुशी की तरह, ज़िन्दगी की तरह,
समय की तरह, खूबसूरती की तरह,
अनुसूया की तरह, अहिल्या की तरह,
सीता की तरह, सावित्री की तरह,
द्रौपदी की तरह, सती की तरह,
सहती हैं वेदना, पीड़ा और अपमान,
मुस्कुरा देती हैं फिर भी, भुला कर,
फिर वही सुबह, फिर वही दिन,
फिर वही जीवन, फिर वही आलोड़न,
छली जाती हैं, युगों-युगों तक,
फिर भी मरती नहीं,
वो चेतना हैं, अनन्त हैं, सर्व हैं,
व्याप्त हैं, सर्वत्र हैं,
वो नहीं हैं, तो जीवन नहीं,
भाव नहीं, भोजन नहीं,
पूजन करो करुणामयरूप का,
कालरूपिणी भी स्त्री है,
विस्मृत नहीं होता है कुछ भी,
चेतन में रहता साकार,
मत करो चेतना का अपमान,
यह काल-चक्र है, आता वहीं पुनः है,
चल दिया था जहाँ से एक दिन.
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