ये महल, दुमहले, चौबारे,
जाना है हाथ पसारे,
फिर आ जाना जननी जठरे,
चिल्लाना देख नज़ारे,
जीवन-चक्र चले ऐसे ही,
समझे या मौज मना ले,
मन के भावों पर परदा,
पहने या रहे उघारे,
अपने मन का मालिक बन,
मन-माफिक काम करा ले,
परपीड़ा को जाने,
औरों के दुःख निवारे,
जीवन वही, समर्पित हो जो,
मानवता की सेवा में,
एक मुक्ति का मार्ग वही,
ना भेद करे जो लोगों में।
जाना है हाथ पसारे,
फिर आ जाना जननी जठरे,
चिल्लाना देख नज़ारे,
जीवन-चक्र चले ऐसे ही,
समझे या मौज मना ले,
मन के भावों पर परदा,
पहने या रहे उघारे,
अपने मन का मालिक बन,
मन-माफिक काम करा ले,
परपीड़ा को जाने,
औरों के दुःख निवारे,
जीवन वही, समर्पित हो जो,
मानवता की सेवा में,
एक मुक्ति का मार्ग वही,
ना भेद करे जो लोगों में।
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