प्रकृति ने मनुष्य को दो रूपों में बनाया है। लड़का या लड़की।
माँ बनने जा रही हर लड़की के मन में यह जानने की उत्सुकता होती है कि उसके गर्भ में पल रही संतान लड़की है या लड़का है। इस विषय पर तीन अलग़-अलग़ देशों के संदर्भ देखते हैं।
1. भारत से सुदूर पश्चिम (अमेरिका):-
यहाँ माता-पिता बनने जा रहे दम्पति को डॉक्टर पहले ही बता देते हैं कि आपके घर बेटी आने वाली है या बेटा। (आज ही अपने एक मित्र दम्पति से हुई बातचीत के आधार पर कह रही हूँ) ये बात वैसे भी अनेक मित्रों के लिये नई नहीं है क्योंकि आपमें से अनेक लोग इस प्रैक्टिस से परिचित हैं।
A) मेरी जिज्ञासा यह है कि जेन्डर डिफरेंस में विश्वास न करने वाला देश इस प्रकार की प्रैक्टिस क्यों करता है?
B) बेटा हो या बेटी हो, यह बात पैदा होने के बाद ही पता चले तो उसके क्या नुकसान हैं, पहले जानकारी होने के क्या फ़ायदे हैं?
2. भारत :-
भारत में लिङ्ग परीक्षण अवैध है। अतः सामान्य तौर पर यह जानकारी सिर्फ़ डॉक्टर को ही होती है कि गर्भ में पल रही संतान लड़की है या लड़का है।
A) मेरी जिज्ञासा है कि भारत के कई परिवारों में आज भी नवजात शिशु के पैदा होने से पूर्व ख़रीदारी करने का रिवाज़ नहीं है। ऐसा करने के पीछे वजहें क्या हैं और ऐसा करने के फ़ायदे क्या हैं?
3. सुदूर पूर्व (जापान):-
जापान भी अमेरिका के नक़्शे-क़दम पर चलता है और यहाँ भी अजन्मे बच्चे का जेंडर बता देते हैं।
इसके फ़ायदे क्या हैं यह तो नहीं जानती, लेकिन एक नुकसान ज़रूर देखा है। दो वर्ष पूर्व एक बांग्लादेशी मित्र थीं यहाँ, एक बच्ची की माँ, दुबारा माँ बनने वाली थीं, मुझे ख़रीदारी करती हुयी मिलीं और मैंने बधाई व भविष्य के लिये शुभकामनायें दीं तो वो उदास हो गयीं कि फ़िर से बेटी है। उस वक़्त मुझे इस प्रकार की पूर्व जानकारी का कोई औचित्य समझ में नहीं आया।
जहाँ तक जापानियों का प्रश्न है, मुझे लगता है कि पूर्व जानकारी से उन्हें कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता है, यहाँ वैसे भी बच्चों की जनसँख्या अनुपात में काफ़ी कम है।
जहाँ तक जापानियों का प्रश्न है, मुझे लगता है कि पूर्व जानकारी से उन्हें कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता है, यहाँ वैसे भी बच्चों की जनसँख्या अनुपात में काफ़ी कम है।
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