Tuesday, January 19, 2016

"जैपनीज़ टी सेरेमनी"

जैपनीज़ टी सेरेमनी जापानी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी व्यक्ति के लिये यह एक अद्भुत व अभूतपूर्व बात हो सकती है। अपने अनुभव के आधार पर मैं अवश्य यह कहूँगी कि यदि संभव हो तो इसका अनुभव करना चाहिये।
यह "टी हाउस" हमारे निवास स्थान के बहुत नज़दीक है लेकिन कभी जाने का सोचा नहीं था, कारण था भाषा की जानकारी न होना। उस दिन 5 जनवरी, 2016 को सुबह सेंसेई ने फ़ोन किया, "अनामिका-सान, Are you busy?", (मुझे लगा कि मुझे उनके साथ शायद डांस क्लास में जाना था और मैं भूल गयी हूँ), मैंने पूछा, "Do we have dance class today?", सेंसेई की आवाज़,"No, no, not that, I want you to come for a Japanese Tea Ceremoney today at 1 O'Clock, Can you and Swarnim come? अपने तीन वर्षों के प्रवास में मैंने कभी इस बारे में सोचा ही न था। बेमन से ही सही, मैं राज़ी हो गयी।
हम दोनों सही समय पर कल्चर ज़ोन (जहाँ यह टी हाउस है) पहुँच गये।
वहाँ जाकर सेंसेई से पता चला कि यह विशेष सेरेमनी इस टी हाउस में साल में सिर्फ़ एक बार होती है, उन्हें इसकी जानकारी थी क्योंकि उनके पास पैम्फेलेट्स आते हैं (आते तो हमारे यहाँ भी हैं पर हम कौन सा पढ़ पाते हैं)।
अब हम टी हाउस में जाते हैं, जनवरी की ठंड में ये पहला कोज़ी रूम बड़ा अच्छा लगा। उसके बाद एक "तातामी रूम" है, तातामी रूम में ही बैठकर चाय पी जायेगी। तातामी रूम में जाने से पहले जूते हटाने होते हैं और एक दो सीढ़ी चढ़कर तातामी रूम आता है। इस रूम में तीन तरफ़ लकड़ी की दीवारें हैं और एक तरफ़ की पूरी दीवार काँच की है, यह हिस्सा गार्डन की तरफ़ खुलता है। यह तातामी रूम काफ़ी बड़ा है। हम तीनो लोग, सेंसेई, स्वर्णिम और मैं इस प्रकार बैठाये जाते हैं कि चाय पीते समय हम गार्डन को आराम से देख सकें। चाय सर्व करने वाली महिला प्रौढ़ हैं, उन्होंने किमोनो पहना हुआ है, उनकी सहायिका एक युवती हैं, इन्होंने ही हमें टी रूम में वेलकम किया था। तातामी रूम के बीच में ज़मीन के अंदर एक हीटर रखा है, जिस पर एक लोहे के भारी से बर्तन में पानी गर्म हो रहा है, इस केतलीनुमा बर्तन से पानी की भाप निकल रही है जो कि माहौल को और कोज़ी बना रही है। बर्तन के एक तरफ़ हम तीनो बैठे हैं और दूसरी तरफ़ चाय सर्व करने वाली महिला बैठी हैं। जापानी लोग आराम से वज्रासन में बैठ लेते हैं पर मेरे लिये यह बहुत कठिन काम है अतः हमें विदेशी होने के नाते छूट मिल गयी और हम आराम से सुखासन में बैठ लिये।
चाय सर्व करने से पहले हम तीनों के सामने स्ट्राबेरी फ़्लेवर की एक मिठाई रखी गयी, इसे खाने के लिये बांस के बने छोटे-छोटे चम्मच भी रखे गये। ये चम्मच हैंडमेड थे और उन्होंने ही बनाये थे जो चाय सर्व करने वाली थीं। मिठाई दिये जाने का कारण यह बताया गया कि, "ग्रीन पाउडर्ड टी" जिसे जापानी भाषा में "माचा" कहते हैं पीने में कड़वी होती है, मिठाई के साथ कम कड़वी लगती है। आधी मिठाई खा चुके होने के बाद चाय सर्व की गयी।
चीनी मिट्टी के प्यालों में ग्रीन टी का पाउडर था, हमारे सामने के पानी के बर्तन से, एक बांस के चमचे से, पानी निकाल कर चाय के प्यालों में डाला गया। अब हम तीनों को एक-एक बीटर (बांस का बना हुआ) दिया गया, इस बीटर से चाय के पाउडर और पानी को इस प्रकार मिलाना था कि झाग बन जाये (ऐसी ग्रीन टी मैंने पहली बार ही पी थी, बेशक़ कड़वी ही थी). चाय पीने का यह अनुभव इसलिये ख़ास है कि यह एक परिवेश को सम्पूर्णरूप से आत्मसात करने का अनुभव था, किसी प्रकार की जल्दी नहीं, कोई हड़बड़ी नहीं, चाय पीते हुये बाहर गार्डन को निहारना और तातामी रूम की कोज़ीनेस और हरी चाय की ख़ुशबू को हमेशा के लिये बसा लेना। किसी ज़माने में ये टी हॉउसेज़ मंत्रणा कक्ष होते थे। जापान में टी हाउस अपेक्षाकृत काफ़ी बड़े आकार के होते हैं, यह कोई सामान्य बात नहीं है, क्योंकि यहाँ इतनी जगह तो महँगे रेस्टॉरेंट्स में भी नहीं होती।
टी सेरेमनी के दौरान दो महिला आगंतुक और आयीं, साथ में आये पाँच बच्चे। तीन बच्चे जो शायद नर्सरी या प्ले ग्रुप के बच्चे थे, उन्हें इस एक्सपीरियंस के लिये लाया गया था, बाकी दो बच्चे छोटे थे और अपनी-अपनी मम्मियों से चिपके थे। इन तीनों बच्चों में एक लड़का और दो लड़कियाँ थीं। लड़का हर बात पर सिर हिलाता जा रहा था और जैसे ही मिठाई सर्व की गयी, उसने फ़टाफ़ट निपटाई। मैं मन ही मन सोचती रही कि बेटा अब माचा कैसे निपटाओगे, स्वीटू। बड़ा प्यारा लगा वो नन्हा-मुन्ना। दुनियाभर के लड़के मिठाई के शौक़ीन होते हैं, ये विश्वास भी पुख़्ता हो गया। गोलू-मोलू को वहीं छोड़ हम गार्डन में निकल गये। वहाँ तालाब में मछलियाँ देखीं और प्लम के फ़ूल सूँघते हुये घर वापस आ गये।
इस अनोखे अनुभव के बारे में यही कह सकती हूँ कि कुछ खुशबुएँ और कुछ दृश्य हमेशा के लिये दिल में बस गये।
(अधिक जानकारी के लिये यह लिंक भी शेयर कर रही हूँ:-
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Japanese_tea_ceremony)

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