पिता बोता है सपने,
सुनहरे, रुपहले, सतरंगी, अनोखे,
रोज़,
पिता बढ़ता है वट सा,
छाया देता, पोषक, रक्षक,
रोज़,
पिता बदलता है सपने,
बच्चों के सपनों से,
रोज़,
पिता देता है उड़ान,
पंखों को, डोर जीवन की,
रोज़,
पिता मिटाता है रुकावट,
बनकर एक रुकावट,
रोज़,
पिता पी जाता है आँसू, विदा के
बसाकर बेटी को दिल में,
रोज़,
पिता सहता है पीड़ायें,
अनेक, प्रेम के बदले में,
रोज़,
पिता होता है इक बाग़बाँ,
देख कोंपलें ख़ुश होता है,
रोज़,
पिता चुकाता है क़ीमत,
ताक़तवर होने की,
रोज़,
पिता जिज्ञासा की कड़ी,
पहली, आधार ज्ञान का,
रोज़,
पिता खिलता है, बच्चों से,
मुस्कान से, खिलता है चेहरा जिसका,
रोज़,
पिता, पहला परिचय, संसार से,
वयस्क होने से पहले,
रोज़,
पिता साथ है, हमारे सदा,
हर रूप में, हर जगह,
रोज़.…
(हर संवेदनशील पिता को समर्पित)
सुनहरे, रुपहले, सतरंगी, अनोखे,
रोज़,
पिता बढ़ता है वट सा,
छाया देता, पोषक, रक्षक,
रोज़,
पिता बदलता है सपने,
बच्चों के सपनों से,
रोज़,
पिता देता है उड़ान,
पंखों को, डोर जीवन की,
रोज़,
पिता मिटाता है रुकावट,
बनकर एक रुकावट,
रोज़,
पिता पी जाता है आँसू, विदा के
बसाकर बेटी को दिल में,
रोज़,
पिता सहता है पीड़ायें,
अनेक, प्रेम के बदले में,
रोज़,
पिता होता है इक बाग़बाँ,
देख कोंपलें ख़ुश होता है,
रोज़,
पिता चुकाता है क़ीमत,
ताक़तवर होने की,
रोज़,
पिता जिज्ञासा की कड़ी,
पहली, आधार ज्ञान का,
रोज़,
पिता खिलता है, बच्चों से,
मुस्कान से, खिलता है चेहरा जिसका,
रोज़,
पिता, पहला परिचय, संसार से,
वयस्क होने से पहले,
रोज़,
पिता साथ है, हमारे सदा,
हर रूप में, हर जगह,
रोज़.…
(हर संवेदनशील पिता को समर्पित)
Compared 'Mother' as relation 'Father' is not given that much focus in Literature. I think your poem is a milestone. Which has given justice to Father. Thank you :-)
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