कल किसी ने इनबॉक्स में पूछा "ख़ुशी कहाँ है?", मैं मन ही मन मुस्कुरायी, अजी ये तो शाश्वत प्रश्न है, सदियों से ज्ञानीजन यही तो ख़ोज रहे हैं।
अच्छा प्रश्न है ना मित्रों, इसके उत्तर में कुछ बिंदु यहाँ रख रही हूँ, आप इस सूची को विस्तार दें। (आज प्रवचन देने के मूड में हूँ, मन न हो तो आगे मत पढ़ना)
1. ख़ुशी आपका प्रथम और जन्मसिद्ध अधिकार है।
2. ख़ुशी आपकी नितान्त व्यक्तिगत संपत्ति है, किसी दूसरे से इसका कोई ख़ास लेना-देना नहीं, जबतक आप स्वयं न चाहें।
3. ख़ुशी हाथ में उठाई हुई रेत के असंख्य कणों जितनी असीम है, बस इसे पकड़ने की कोशिश मत करना, सब सरक जायेगी, कुछ कण ही चिपके रह जायेंगे।
4. ख़ुशी जल की शीतलता में भी है और उसकी गर्माहट में भी, वक़्त-वक़्त की बात है।
5. ख़ुशी का आपकी बौद्धिकता, पद, प्रतिष्ठा, सम्पन्नता से कोई ख़ास लेना-देना नहीं है, सत्य से इसका सीधा सम्बन्ध ज़रूर है, आप जितना अधिक झूठ बोलेंगे उसी अनुपात में नाख़ुश रहेंगे। यदि आप ये समझते हैं कि आपके झूठ को पकड़ने वाली कोई मशीन ही ईज़ाद नहीं हुई आज तक, मतलब कि आप बहुत स्मार्ट हैं, तो भइया आपका दिल बहुत ज़ल्द इसका जवाब आपको देने वाला है।
6. ख़ुशी आपका चयन है, आपके पास दूसरा विकल्प भी नहीं, दुःख-तकलीफ़ की कहीं कोई कमी नहीं, आपकी सोच पर ही सब निर्भर करता है।
7. हर बार हर चीज़ आपके अनुसार नहीं हो सकती, लाख़ परहेज़ से रहिये, कुछ-न-कुछ तो लगा ही रहेगा ना, "टेक इट ईज़ी (Take it Easy)"।
8. Keep it Simple Silly (KISS) ये अपना लें तो काफ़ी हद तक ख़ुश रहा जा सकता है।
9. शांत मन ही ख़ुश रहता है, मन को शांत रखने के प्रयास करने न छोड़े। इस रास्ते पर मित्र हमारे सबसे बड़े साथी होते हैं, उतार-चढ़ाव सबकी ज़िन्दगी में आते हैं, आप अकेले नहीं।
10. अंतिम मार्ग जो ख़ुशी के रास्ते पर ले जाता है, वो "आराधना" का मार्ग है, या तो अपने कर्म से प्रेम करिये, या जिससे प्रेम हो उसके लिये कर्म करिये, तभी आप ख़ुश रह सकेंगे। ना ही आप प्रेम करना चाहते हैं, ना ही आप कर्म करना चाहते हैं तो ये प्रश्न पूछना बंद कर दीजिये कि, ख़ुशी कहाँ है? अरे भई ख़ुशी का मन, जहाँ मन किया चली गयी, कोई आपकी ग़ुलाम थोड़े न है।
अच्छा प्रश्न है ना मित्रों, इसके उत्तर में कुछ बिंदु यहाँ रख रही हूँ, आप इस सूची को विस्तार दें। (आज प्रवचन देने के मूड में हूँ, मन न हो तो आगे मत पढ़ना)
1. ख़ुशी आपका प्रथम और जन्मसिद्ध अधिकार है।
2. ख़ुशी आपकी नितान्त व्यक्तिगत संपत्ति है, किसी दूसरे से इसका कोई ख़ास लेना-देना नहीं, जबतक आप स्वयं न चाहें।
3. ख़ुशी हाथ में उठाई हुई रेत के असंख्य कणों जितनी असीम है, बस इसे पकड़ने की कोशिश मत करना, सब सरक जायेगी, कुछ कण ही चिपके रह जायेंगे।
4. ख़ुशी जल की शीतलता में भी है और उसकी गर्माहट में भी, वक़्त-वक़्त की बात है।
5. ख़ुशी का आपकी बौद्धिकता, पद, प्रतिष्ठा, सम्पन्नता से कोई ख़ास लेना-देना नहीं है, सत्य से इसका सीधा सम्बन्ध ज़रूर है, आप जितना अधिक झूठ बोलेंगे उसी अनुपात में नाख़ुश रहेंगे। यदि आप ये समझते हैं कि आपके झूठ को पकड़ने वाली कोई मशीन ही ईज़ाद नहीं हुई आज तक, मतलब कि आप बहुत स्मार्ट हैं, तो भइया आपका दिल बहुत ज़ल्द इसका जवाब आपको देने वाला है।
6. ख़ुशी आपका चयन है, आपके पास दूसरा विकल्प भी नहीं, दुःख-तकलीफ़ की कहीं कोई कमी नहीं, आपकी सोच पर ही सब निर्भर करता है।
7. हर बार हर चीज़ आपके अनुसार नहीं हो सकती, लाख़ परहेज़ से रहिये, कुछ-न-कुछ तो लगा ही रहेगा ना, "टेक इट ईज़ी (Take it Easy)"।
8. Keep it Simple Silly (KISS) ये अपना लें तो काफ़ी हद तक ख़ुश रहा जा सकता है।
9. शांत मन ही ख़ुश रहता है, मन को शांत रखने के प्रयास करने न छोड़े। इस रास्ते पर मित्र हमारे सबसे बड़े साथी होते हैं, उतार-चढ़ाव सबकी ज़िन्दगी में आते हैं, आप अकेले नहीं।
10. अंतिम मार्ग जो ख़ुशी के रास्ते पर ले जाता है, वो "आराधना" का मार्ग है, या तो अपने कर्म से प्रेम करिये, या जिससे प्रेम हो उसके लिये कर्म करिये, तभी आप ख़ुश रह सकेंगे। ना ही आप प्रेम करना चाहते हैं, ना ही आप कर्म करना चाहते हैं तो ये प्रश्न पूछना बंद कर दीजिये कि, ख़ुशी कहाँ है? अरे भई ख़ुशी का मन, जहाँ मन किया चली गयी, कोई आपकी ग़ुलाम थोड़े न है।
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