अपनी-अपनी दुश्वारियों से जूझते हम-आप सब,
कभी मिल बैठेंगे तो बतियाएंगे।
कुछ किस्से कहेंगे अपनों के, गैरों के,
गीत कुछ गुनगुनाएंगे।
ज़िन्दगी ख़ुदग़र्ज़ है, बुलाने पर नहीं आती,
मिलेगी जिस दिन, पकड़ बैठेंगे, मुस्कुरायेंगे।
दोस्तों का साथ और, अपनों की बात और,
कुछ जख़्म कुरेदेंगे, मलहम कुछ पर लगायेंगे।
मत समझना बड़े मज़बूत हो, ग़फ़लत में न जीना,
दिल के तार छेड़ेंगे तो, अश्क़ ढ़लक जायेंगे।
कहने का सलीक़ा हो तो, बातें भी फ़ूल बनें,
बताने से उसके, न जाने क्या-क्या मंज़र नज़र आयेंगे।
दिल से दिल मिल जाये, तो जीना आसान बने,
ग़ैरों में क़ूवत है मोहब्बत की, देखकर अपने भी शर्मायेंगे।
मत कर ऐहसान फ़रामोशी ऐ दीवाने इंसान,
उसको ही नहीं, एक दिन ग़म तुझको भी रुलायेंगे।
होगा हिसाब ज़िंदगी का तेरा भी, मेरा भी,
एक दिन फ़रिश्ते तुझको भी और मुझको भी, ले जाएंगे।
कभी मिल बैठेंगे तो बतियाएंगे।
कुछ किस्से कहेंगे अपनों के, गैरों के,
गीत कुछ गुनगुनाएंगे।
ज़िन्दगी ख़ुदग़र्ज़ है, बुलाने पर नहीं आती,
मिलेगी जिस दिन, पकड़ बैठेंगे, मुस्कुरायेंगे।
दोस्तों का साथ और, अपनों की बात और,
कुछ जख़्म कुरेदेंगे, मलहम कुछ पर लगायेंगे।
मत समझना बड़े मज़बूत हो, ग़फ़लत में न जीना,
दिल के तार छेड़ेंगे तो, अश्क़ ढ़लक जायेंगे।
कहने का सलीक़ा हो तो, बातें भी फ़ूल बनें,
बताने से उसके, न जाने क्या-क्या मंज़र नज़र आयेंगे।
दिल से दिल मिल जाये, तो जीना आसान बने,
ग़ैरों में क़ूवत है मोहब्बत की, देखकर अपने भी शर्मायेंगे।
मत कर ऐहसान फ़रामोशी ऐ दीवाने इंसान,
उसको ही नहीं, एक दिन ग़म तुझको भी रुलायेंगे।
होगा हिसाब ज़िंदगी का तेरा भी, मेरा भी,
एक दिन फ़रिश्ते तुझको भी और मुझको भी, ले जाएंगे।
No comments:
Post a Comment