Saturday, December 26, 2015

"सम्बन्धों की भावना"

वो भी एक दिसंबर था। उन दिनों मैं hostel में रहकर GRE और TOEFL के exam की तैयारी कर रही थी। क़रीब 6 महीने, लगातार इसकी तैयारी में ख़र्च कर दिये थे, बैरॉन्स, प्रिंसटन, नॉर्मन लुइस, ऑनलाइन GRE क्विज़ेज, मेमोरी कार्ड्स और पता नहीं क्या-क्या।
दिन में ऑफ़िस में काम करती, और सुबह-शाम-रात पढ़ाई और entertainment के नाम पर गाने।
GRE practice test के बारे में एक विश्वास(अंधविश्वास) था कि जितना score आप practice test में करते हैं वही score आपके final में भी आता है। इस विश्वास से डरी हुई मैं सोचती थी कि एकदम एकांत में ही टेस्ट लगाऊँगी, जब किसी भी प्रकार के disturbance की संभावना एकदम ना के बराबर होगी।
एक और बड़ा ही strong belief था मेरा, कि आराम करने वाले कुछ नहीं सीख पाते हैं, तो चाहें सर्दी हो या गर्मी, करना है तो करना है, ज़िद कहते हैं इसे  इसलिये, आधी रात को test लगाने बैठती थी, अपने प्रिय कंप्यूटर पर। GRE test के पहले प्रश्न से ही decide हो जाता है कि आपका graph ऊपर जायेगा या नीचे। अतः पहला प्रश्न सही होना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। बहुत गंभीर क़िस्म का test है (कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगता था)
ऐसी ही एक सर्द रात को मेरी प्यारी रूममेट (रूम अलग़-अलग़ ही होते थे), को मुझ पर दया आयी और उसने मेरे लिये ग्लास भर चाय बनाकर मुझे दी। मेरे लिए यह बिल्कुल अप्रत्याशित और अनपेक्षित था, उस वक़्त ऐसा ही लगा मानो ज़न्नत मिल गयी है। रात के शायद 3 बजे होंगे। आज भी इतने वर्षों के बाद यह याद इतनी ताज़ा है कि जैसे कल ही की बात हो। वो अपनी घर-गृहस्थी में व्यस्त हैं मैं अपनी, लेकिन ऐसे ही छोटे-छोटे पलों ने जो हमारा सम्बंध जोड़ा वह आजतक क़ायम है। समय और दूरी सम्बन्धों की इस भावना को बदल नहीं पाये इसलिये मैं ईश्वर की बहुत आभारी हूँ, आज भी वो मेरे मन की बात बिना मेरे ज़ाहिर किये समझ जाती हैं।
काश कि हर सम्बंध ऐसा ही हो पाता।
- प्रिय गीता, तुम्हें समर्पित।

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