Saturday, December 19, 2015

(23) "बेख़ुदी"

ख़ुशियों का समंदर है,
या ग़म की ये गहराई है,
वादियों की ख़ामोशी है,
या मन की ये तन्हाई है,

तुमसे मिलने की ख़ुशी है,
या आलम-ऐ-बेरुख़ी है,
कुछ दूर तक तो साथ चल,
फ़िर इक ग़मग़ीन ज़ुदाई है,

तेरा नाम बड़ा ऊँचा है,
नाम लेना भी रुसवाई है,
ख़याल भर ही से तेरे,
कहीं शबनम मुस्कुराई है,

आग़ के दरिया में सम्हलना है,
या पार होना ही बेमानी है,
रूठ गयी है ज़िन्दगी तेरी,
या तेरा अंदाज़-ऐ-बेख़ुदी है।

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