Tuesday, December 8, 2015

(22) "बिसात"

ज़िन्दगी की बिसात पर,
ज़िन्दगी की बाज़ी क्या,
क्या होती है शोहरत,
होती है बर्बादी क्या,

ग़र मिल सके सुकूँ कहीं,
दो पल को ठहर जा,
किसी से थी मोहब्बत कभी,
उससे अब लड़ाई क्या,

समय का पहिया यूँ ही चले,
हर बात तेरे बस में नहीं,
कभी था इंतज़ार तुझे,
अब फ़िक़्र क्या रुसवाई क्या,

छू लेना है तुझको तेरा मकां,
फ़िर ज़ब्त क्या परेशानी क्या,
पानी है तुझको दौलत सच्ची,
अब अच्छाई क्या बुराई क्या।

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