बहुत-बहुत दिनों के बाद मिल पाती हैं औरतें,
घरभर के काम-काज में उलझी रहती हैं औरतें,
प्रेम का हक़ भले न हो कर्तव्य पर निभाती हैं औरतें,
जाने क्या बँधन होता है जिसे हर हाल संवारती हैं औरतें,
आजकल दिल अपना कम ही खोलती हैं औरतें,
आँखों ही आँखों में बहुत कुछ कह जाती हैं औरतें,
बेटियों को गणित और विज्ञान में उलझाती हैं औरतें,
अपने सपनों को बच्चों की आँखों में सजाती हैं औरतें,
कितना कुछ सहती हैं फ़िर भी कम कहती हैं औरतें,
दिल में ज़ब्त करके बहुत मुस्कान बिखेरती हैं औरतें,
कभी वामपंथ तो कभी दक्षिणपंथ को गरियाती हैं औरतें,
अपने हालात में रत्तीभर भी बदलाव न कर पाती हैं औरतें,
कभी साड़ी-लहँगे, कभी जीन्स में टिकाई जाती हैं औरतें,
वक़्त, माहौल, देश, धर्म के अनुसार बदलाई जाती हैं औरतें,
कभी मोहरा, कभी देवी, कभी वेश्या बना दी जाती हैं औरतें,
सह-देख-सुन कर, तमाशा दुनिया का, चली जाती हैं औरतें।
घरभर के काम-काज में उलझी रहती हैं औरतें,
प्रेम का हक़ भले न हो कर्तव्य पर निभाती हैं औरतें,
जाने क्या बँधन होता है जिसे हर हाल संवारती हैं औरतें,
आजकल दिल अपना कम ही खोलती हैं औरतें,
आँखों ही आँखों में बहुत कुछ कह जाती हैं औरतें,
बेटियों को गणित और विज्ञान में उलझाती हैं औरतें,
अपने सपनों को बच्चों की आँखों में सजाती हैं औरतें,
कितना कुछ सहती हैं फ़िर भी कम कहती हैं औरतें,
दिल में ज़ब्त करके बहुत मुस्कान बिखेरती हैं औरतें,
कभी वामपंथ तो कभी दक्षिणपंथ को गरियाती हैं औरतें,
अपने हालात में रत्तीभर भी बदलाव न कर पाती हैं औरतें,
कभी साड़ी-लहँगे, कभी जीन्स में टिकाई जाती हैं औरतें,
वक़्त, माहौल, देश, धर्म के अनुसार बदलाई जाती हैं औरतें,
कभी मोहरा, कभी देवी, कभी वेश्या बना दी जाती हैं औरतें,
सह-देख-सुन कर, तमाशा दुनिया का, चली जाती हैं औरतें।
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