Tuesday, February 23, 2016

"प्रेम के बारे में" (4)

प्रेम और उसका प्रदर्शन....
प्रश्न उठता है कई बार, कई-कई बार, कि क्या "प्रेम में प्रदर्शन" आवश्यक है? क्या "प्रेम का प्रदर्शन" आवश्यक है?
हाँ, आवश्यक है।
प्रेम का प्रदर्शन आवश्यक है, उससे, जिससे प्रेम है। प्रेम का प्रदर्शन दुनिया के लिये क्यूँ हो? दुनिया को क्या मतलब कि आप प्रेम में हैं या नहीं? यदि आप प्रेम में हैं तब तो यह स्वतः प्रकट है, प्रेम में होने के भौंडे प्रदर्शन की आवश्यकता क्या है?
क्या आप नहीं चाहते कि जो आपसे प्रेम करे वो जता भी दे।
कई बार लोग कहते पाये जाते हैं कि हम कोई "माइंड रीडर" थोड़े ही हैं जो बिना कहे समझ जायें। सही भी है, बिना कहे कोई कैसे जाने।
आमतौर पर कहा जाता है कि पहेलियाँ बुझाना अधिक लोगों को पसंद नहीं होता, जो बात है वो सीधे तौर पर कही जानी चाहिये, है कि नहीं!!!
लेकिन प्रेम का मामला तो बड़ा टेढ़ा है, सीधे कैसे कह दिया जाये, समझने की बात है, अब समझा कैसे जाये। बहुत चक्कर है।
प्रेम के सार्वजनिक प्रदर्शन का जग दीवाना हुआ लगता है, अतः प्रेम में होना आवश्यक नहीं रह गया, उसका प्रदर्शन ही आवश्यक है शायद।

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