Tuesday, February 2, 2016

"कानपुर स्मार्ट सिटी है"

कानपुर को स्मार्ट सिटीज़ की लिस्ट में नहीं चुना गया इस बात से हम सभी दुःखी भी हुये और क्रोधित भी। कुछ लोगों की प्रतिक्रियायें तो इस प्रकार लगीं जैसे किसी एग्जाम में फ़ेल हो जाने पर घर वाले बच्चे को ही डाँटने-डपटने लगते हैं कि तू है ही नालायक, तेरा कुछ हो ही नहीं सकता (मसलन, कानपुर हमेशा से ही गन्दा है, यहाँ के लोगों में सिविक सेंस नहीं है, आदि आदि)।
क्या आप भी ऐसी ही नकारात्मक सोच रखते हैं? यदि हाँ तो ज़रा ग़ौर फरमाइये:-
1. आज़ादी की लड़ाई की चिंगारी सुलगाने वाला शहर है कानपुर, ये शहर न होता तो आज हमारा संविधान न होता। अँग्रेज़ों की ग़ुलामी से आज़ाद हो गये तो क्या गन्दगी और लाचारी दूर न कर सकेंगे?
2. अनेक डॉक्टर, इंजीनियर, IAS, IPS, वक़ील, शिक्षाविद, साहित्यकार, गायक, व्यापारी, उद्यमी, कानपुर से ही निकले हैं और दुनियाभर में छाये हैं। अग़र कानपुर में लाखों बुराइयाँ ही हैं तो यह कैसे संभव हुआ?
3. पूरे उत्तर प्रदेश में महिलाओं की साक्षरता का प्रतिशत भी सबसे अधिक कानपुर में ही है। ~71%, क्या शिक्षित महिलायें सहयोग न करेंगी?
किसी प्रतियोगिता में चयन हो पाना या न हो पाना कई कारणों पर निर्भर हो सकता है परंतु इसका अर्थ यह नहीं है हम सब आत्महीनता की भावना से ग्रस्त हो जायें, और ख़ुद को ही ख़री-खोटी सुनाने लगें।
यदि आपको शहर के प्रशासन व रख-रखाव में अनेक समस्यायें दिखती हैं तो कृपया स्वयं से भी पूछें कि क्या सही जगह सवाल उठाये गये हैं? यदि नहीं, तो क्या अब सवाल नहीं उठाये जाने चाहियें? ख़ुद से भी पूछिये, कितना बदला है ख़ुद को?
क्या बिना सरकारी सहायता के हम स्मार्ट नहीं हो सकते?

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