अपने चारों ओर नज़र दौड़ाइये और आप पायेंगे कि जीवन की एक विशेष गति होती है। हर शहर, हर गाँव, हर देश की एक ख़ास गति। हम उस प्रवाह से अलग़ नहीं हैं। क्योंकि हम उस प्रवाह से अलग़ नहीं हैं, अतः जिस समय, स्थान और काल में हम उपस्थित हैं वहाँ हमारी अनुपस्थिति से कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता है। जो लोग आज आपके जीवन में हैं, जब वे नहीं थे तब भी आपका जीवन चल रहा था, जब वे नहीं होंगे तब भी आपका जीवन (यदि बाकी है तो) चलेगा। यही बात दूसरों पर भी लागू होती है, आप नहीं होंगे तब भी जीवन चलेगा, अपनी विशेष गति से। आपके पास अपने कर्मों का निर्वाह करते चले जाने के अतिरिक्त विशेष कोई अधिकार नहीं है। जो व्यक्ति इस सत्य से साक्षात्कार कर लेते हैं उनके लिये जीवन थोड़ा आसान हो जाता है।
अपने किये गये कर्मों पर भरोसा रखिये, प्रतिफल अवश्यम्भावी है, न रत्तीभर भी कम न ज़्यादा। धैर्य के साथ समय की प्रतीक्षा कीजिये।
अपने किये गये कर्मों पर भरोसा रखिये, प्रतिफल अवश्यम्भावी है, न रत्तीभर भी कम न ज़्यादा। धैर्य के साथ समय की प्रतीक्षा कीजिये।
No comments:
Post a Comment