(डिस्क्लेमर:- अग़र रोना आ जाये तो मुझे मत कहना, अपने रिस्क पर पढ़ना)
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
माँ से लिपट रोती हैं ज़ार-ज़ार,
पिता से करती हैं,
आँखों ही आँखों में बहुत सा दुलार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
बार-बार जाती हैं बाज़ार,
लाती हैं रंग-बिरंगी चूड़ियाँ काँच की,
खनखनाती हैं झिलमिलाती हैं हर बार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
सोती हैं देर तक निश्चिन्त,
उठती हैं खाने की महक से,
अंतरमन में बसा लेती हैं खुशबू घर की,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
झाँकती हैं देर तक माँ की आँखों में,
चुनने लगती हैं उनमें बसे ख़्वाब,
बस वही जानती हैं सजाना उन ख्वाबों को,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
जानती हैं वापसी का दिन पक्का है,
धूप भर लेती हैं आँचल में अपने,
और रातों का लगा लेती हैं काजल,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
जी लेती हैं बचपन इक बार फ़िर से,
बन जाती हैं पापा की नन्ही गुड़िया,
और सीखती हैं खाना बनाना माँ से,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
मिल लेना चाहती हैं सबसे,
के ये मुलाक़ात आख़िरी हो जैसे,
यादें जमा करती हैं पल-पल बार-बार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
सबकुछ छोड़ आती हैं दहलीज़ पर,
अपने संसार में जाकर जीती हैं,
जन्म लेती हैं फ़िर भी बार-बार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
होती हैं बेहद ख़ूबसूरत कि,
उनके होंठों पर बसती है मुस्कुराहट,
आँखों में चमकते हैं सितारे कई,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
इनका यही अफ़साना है,
के ये संसार भी छूटे सदा,
वो संसार भी बेगाना है।
- अनामिका
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
माँ से लिपट रोती हैं ज़ार-ज़ार,
पिता से करती हैं,
आँखों ही आँखों में बहुत सा दुलार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
बार-बार जाती हैं बाज़ार,
लाती हैं रंग-बिरंगी चूड़ियाँ काँच की,
खनखनाती हैं झिलमिलाती हैं हर बार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
सोती हैं देर तक निश्चिन्त,
उठती हैं खाने की महक से,
अंतरमन में बसा लेती हैं खुशबू घर की,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
झाँकती हैं देर तक माँ की आँखों में,
चुनने लगती हैं उनमें बसे ख़्वाब,
बस वही जानती हैं सजाना उन ख्वाबों को,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
जानती हैं वापसी का दिन पक्का है,
धूप भर लेती हैं आँचल में अपने,
और रातों का लगा लेती हैं काजल,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
जी लेती हैं बचपन इक बार फ़िर से,
बन जाती हैं पापा की नन्ही गुड़िया,
और सीखती हैं खाना बनाना माँ से,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
मिल लेना चाहती हैं सबसे,
के ये मुलाक़ात आख़िरी हो जैसे,
यादें जमा करती हैं पल-पल बार-बार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
सबकुछ छोड़ आती हैं दहलीज़ पर,
अपने संसार में जाकर जीती हैं,
जन्म लेती हैं फ़िर भी बार-बार,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
होती हैं बेहद ख़ूबसूरत कि,
उनके होंठों पर बसती है मुस्कुराहट,
आँखों में चमकते हैं सितारे कई,
मायके आयी हुई लड़कियाँ,
इनका यही अफ़साना है,
के ये संसार भी छूटे सदा,
वो संसार भी बेगाना है।
- अनामिका